27 Apr 2018

सट्टे का नंबर निकाल सकते है


आज हम बात करेंगे सट्टे का नंबर कैसे निकाला जाता है,वैसे तो इस विषय पर मेरा कोई रुचि नहीं है परंतु बहोत सारे साधक मुझे ईमेल करते हैं के हमें सट्टा निकालने हेतु कोई साधना बता दे । सबसे ज्यादा सट्टे का नंबर निकालने हेतु हमारे देश में ख्वाजा खिजर जिंदह पीर जी के मंत्रो का इस्तेमाल किया जाता है,यह एक प्रामाणिक साधना है जिसके माध्यम से हम सट्टे का नंबर निकाल सकते हैं । वैसे तो कहने के लिए यह एक सट्टे का नंबर निकालने की साधना मानी जाती है परंतु यह साधना आकस्मिक धन प्राप्ति करने हेतु होती है । अब जिसे जैसा फायदा होता है,वह वैसे ही गुणगान करता है,लोगों ने आकस्मिक धन प्राप्ति का अर्थ सट्टा लॉटरी जुआ इन शब्दों से जोड़ दिया इसलिए आजके समय में आकस्मिक धन प्राप्ति मतलब यह सब है ।

कुछ लोग इसी साधना के माध्यम से गड़ा हुआ धन कहां है उसे ढूंढने का दावा करते हैं , हो सकता है के ख्वाजा जी कृपा करें और साधक को गूढ़ रहस्यों का ज्ञान प्राप्त हो, अज्ञात वस्तु को ज्ञात करने हेतु यह साधना निश्चित ही कारगर है । मैंने स्वयं कुछ वर्ष पूर्व इस साधना से लाभ प्राप्त किया था परंतु मुझे एहसास हुआ कि यह गलत है,इस प्रकार से आकस्मिक धन प्राप्ति करना एक प्रकार से गलत कार्य है ।

जो व्यक्ति परेशानी में हो और उसे धन प्राप्ति की आवश्यकता हो और वह समय के चक्र के वजह से निराशा हो,उसकी धन प्राप्ति की कामना पूर्ण नहीं हो रही है तो ऐसे समय में ऐसे व्यक्ति को ख्वाजा खिजर जिंदह पीर जी के कृपा का लाभ उठाना चाहिए । इंसान अपनी आवश्यकता अनुसार ही ख्वाजा जी से धन प्राप्ति हेतु प्रार्थना करें ऐसा कदापि ना करें की ख्वाजा जी की कृपा से सट्टे के नंबर निकाल कर अपनी उपजीविका चलाएं,मेहनत करना कठिन है परंतु मेहनत से प्राप्त दो वक्त की रोटी कई व्यंजनों से स्वादिष्ट होती है । जो व्यक्ति अपने जीवन में मेहनत से कुछ भी प्राप्त करता हो तो वह उसके लिए अमूल्य होता है परंतु बिना मेहनत के सट्टा लाटरी जुआ गुप्त निधि प्राप्त करके स्वयं को राजा महाराजा अमीर समझने वाले व्यक्ति ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाते हैं । मेरे लिए तो इस प्रकार का साधना देना कठिन था परंतु प्रत्येक प्रकार के साधना से आपको परिचित करवाना चाहिए ऐसा मानस बनाया और यह साधना दे रहा हू।  निश्चिंत होकर इस साधना के माध्यम से आप अपनी स्वयं की आवश्यकतानुसार या आवश्यकता से ज्यादा धन प्राप्ति की कामना पूर्ण कर सकते हैं ।


साधक हेतु कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है जैसे-

1-ब्रम्हचैर्यत्व का साधना काल मे पालन ।
2-मास मदिरा का साधना काल मे त्याग ।
3-साधना से पूर्व शारिरिक शुद्धी ।
4-किसी भी परिस्थिति में असत्य ना बोले ।
5-साधना निच्छित समय पर ही करे ।
6-पवित्र अन्न ग्रहण करे ।
7-मंत्र जाप के बाद पुनः शारिरिक शुद्धी करना ।


इससे ज्यादा नियम नही है,साधना घर मे एकांत में कर सकते है,साधना रात्रि में 9 बजे के बाद रात्रि में 1 बजे से पहले ही करना आवश्यक है,साधना में सुलेमानी सुरक्षा कवच आवश्यक है क्योंके इस साधना में साधक को दुर्दैव से अतृप्त शक्तियां तकलीफ देती है और उनसे बचने के लिए ही सुलेमानी सुरक्षा कवच धारण करना महत्वपूर्ण है । इस साधना में नित्य "ख्वाजा खिज्र जिंदह पीर ईलम ताबीज को हमेशा जल में रखना पड़ता है और साधना समाप्ति के बाद ताबीज को किसी कांच की शीशी में पानी भरकर उसमे रखना आवश्यक है" । "ख्वाजा खिज्र जिंदह पीर ईलम ताबीज" कोई साधारण ताबीज नहीं है,इसको बनाते समय सही समय और सही लेखन पर बहोत ज्यादा मेहनत करना पड़ता है,इस ताबीज को बनाते समय लोबान का ही धूप दिया जाता है ।


"झूलेलाल जी" सिन्धी हिन्दुओं के उपास्य देव हैं जिन्हें 'इष्ट देव' कहा जाता है। उनके उपासक उन्हें वरुण (जल देवता) का अवतार मानते हैं। वरुण देव को सागर के देवता, सत्य के रक्षक और दिव्य दृष्टि वाले देवता के रूप में सिंधी समाज भी पूजता है। उनका विश्वास है कि जल से सभी सुखों की प्राप्ति होती है और जल ही जीवन है। जल-ज्योति, वरुणावतार, झूलेलाल सिंधियों के ईष्ट देव हैं जिनके बागे दामन फैलाकर सिंधी यही मंगल कामना करते हैं कि सारे विश्व में सुख-शांति, अमन-चैन, कायम रहे और चारों दिशाओं में हरियाली और खुशहाली बने रहे। ख्वाजा खिज्र जिन्दह पीर के नाम से मुसलमान भी इन्हें पूजते है,कहेते है कि जब ख्वाजा जी एक बार अल्लाह से मिलने गए तो लोगों ने समझा कि उन्होंने देह त्याग कर दिया है, तब उनको दफनाने के लिए ले जाया गया, लेकिन कब्र में उन्होंने आँखें खोल दी और जिंद हो गए तबसे उनको जिन्दह पीर के नाम से लोग जानने लगे । इस तरह आपको ख्वाजा जी के बारे में बहोत कुछ जानने मिलेगा जो सभी साधको हेतु आवश्यक है । ख्वाजा जी गुप्त विद्या और ज्ञान को साधकों के लिए प्रसन्न होते ही प्रगट कर देते है ।


इस साधना को करने से पहिले 11 दिनों तक मंत्र का जाप करे,ख़्वाजी को बुलाने का मंत्र -

।। या ख़्वाजा, या खिज्रत या दस्तगीर अली अल मदत ।।


इस मंत्र के जाप के बाद साधना शुरू करने से पूर्व काले धागे में सुलेमानी रक्षा कवच धारण करे और सामने एक कटोरी रखे,कटोरी में शुद्ध जल भरना है । अब इस कटोरी में "ख्वाजा खिज्र जिंदह पीर ईलम ताबीज" को रखना है,ताबीज पाणी मे ही डुबोये रखे । जल में थोडासा जन्नत-ए-फिरदौस इत्र डाले और लोबान का अगरबत्ती अवश्य जलाए ।

पूर्ण विधि-विधान साधना सामग्री के साथ ही दिया जाएगा,क्योंके यह साधना टाइमपास करने वालो के लिए नही है । जो साधक सही में साधना करना चाहता हो सिर्फ उसे ही साधना देना संभव है ।

इस साधना को सम्पन्न करने के बाद आप सट्टे का नंबर सफेद कोरे कागज पर अपने आंखों से देखा जा सकता है,21 बार मंत्र बोलने के बाद समय से पहिले आनेवाले सट्टे का नंबर कागज पर लिखकर आता है,यह बहोत सारे साधको का अनुभव भी रहा है । आप इस साधना के माध्यम से 21 घंटे से पूर्व ही सट्टे का नंबर निकाल सकते हो । हो सकता है शुरुआत में कुछ नंबर गलत आया हो परंतु सही नंबर भी कोरे कागज पर देखने मिलेंगे,चाहे कोई माने या ना माने पर कोरे कागज पर सट्टे का नंबर देखने मिलता है,सही तरहा से साधना में कोशिश करेंगे तो सफलता मिल सकती है । ऐसा साधना आज के समय मे परम गोपनीय और दुर्लभ है,इस साधना से किसी भी प्रकार का हानी नही होता है । आवश्यक साधना सामग्री आपको प्रामाणिक ही मिलेगा,इस बारे में चिंता ना करे ।


साधना सामग्री हेतु email के माध्यम से संपर्क करे-

snpts1984@gmail.com

साधना सामग्री न्यौछावर राशि:
3650/-रुपये






आदेश.....