13 Jul 2013

यंत्र प्राण-प्रतिष्ठा विधि





यहा दो प्रकार का यंत्र प्राण-प्रतिष्ठा विधि दे रहा हु

1) साबर 2) तान्त्रोक्त यंत्र प्राण-प्रतिष्ठा विधि

श्री गणेश जी और गुरुमंत्र का जाप करले

1)साबर यंत्र प्राण-प्रतिष्ठा विधि

निम्न मंत्र का 108 बार जाप करके लाल रंग की अक्षत चढ़ाये॰

सत नमो आदेश । गुरुजी को आदेश । ॐ गुरुजी । ॐ सोहं हंसाय विदमहे प्राण-प्राणाय धीमही तन्नो ज्योति स्वरूप प्रचोदयात । श्री नाथजी गुरुजी को आदेश । आदेश ।


 अब निम्न मंत्र को 108 बार जाप करते हुये यंत्र को स्पर्श करो,


सत नमो आदेश । गुरुजी को आदेश । ॐ गुरुजी । ॐ सों ॐ आं ह्रीं क्रों यं रं लं वं शम षम सं हं स: जती साबर साधना सिद्धि यंत्रस्य प्राण: इह ज्योति स्वरूप जपा-अजपा हंसा: प्राण प्राणाहा:।
ॐ आं ह्रीं क्रों यं रं लं वं शम षम सं हं स: जती साबर साधना सिद्धि यंत्र घट पिंडमे शिव-शक्ति की माया । जीव रूप मे शिव की माया । जीव रूप मे शिव गोरक्षनाथ कहाया ।
ॐ आं ह्रीं क्रों यं रं लं वं शम षम सं हं स: जती साबर साधना सिद्धि यंत्र दस इंद्रियों की काया । पांच तत का किया पसारा । अमर योगी अमर काया । अक्षय योगी सबसे न्यारा । श्री नाथ जी निखिलेश्वरानंदजी के चरण-कमलोकों आदेश । आदेश आदेश ।

निम्न पाचो मंत्र का 11-11 बार जाप करते हुये यंत्र का पूजन करे और यंत्र को स्थापित कर दीजिये

ॐ श्री चैतन्य गोरक्षनाथाय नमो नम:
ॐ श्री चैतन्य कनिफनाथाय नमो नम:
ॐ श्री चैतन्य गहिनिनाथाय नमो नम:
ॐ श्री चैतन्य मच्छिंद्रनाथाय नमो नम:
ॐ श्री चैतन्य निखिलनाथाय नमो नम:

और सभी सिद्धों को निम्न मंत्र बोलते हुये प्रार्थना कीजिये

सत नमो आदेश । गुरु जी को आदेश । ॐ गुरुजी । सिद्ध सुमिर चले गोदावरि तीन भुवन हो सिद्ध भूले भटके पंथ र ध्यावे ,अष्ट सिद्धि नव निधि को पावे सर्व चौरासी सिद्धों इनकी थिर काया अरु वज्र काया पिवों सिद्धों उन्मुख प्याला सर्व के पति श्री शंभुजती गुरु गोरक्षनाथ जी बाला । इतना चौरासी सिद्धों के चरण कमाल को हाथ जोड़कर आदेश । आदेश । नमामि नम:।

अब सारे विधि को सदगुरुजी के श्री चरनोमे समर्पित करे और क्षमा प्रार्थना करे॰       

आदेश निखिलजी का आदेश आदेश............

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2) तान्त्रोक्त यंत्र प्राण-प्रतिष्ठा विधि


संकल्प

दाहिने हाथ मे जल,अक्षत व कुंकुम लेकर संकल्प कीजिये


ॐ विष्णु र्विष्णु र्विष्णु: श्री मदभगवतों महाप्रभावस्य द्वितीय परार्धे श्वेतवारहकल्पे भरतखण्डे पुण्य क्षेत्रे, अमुक गोत्रीय(अपना गोत्र बोले) अमुक शर्माहं (अपना नाम बोले) अद्द अमुक (यंत्र का नाम बोले) यंत्रस्य अमुक (साधना का नाम बोले) साधना संबंधे प्राण-प्रतिष्ठा सिध्यर्थ करिष्ये ॥


विनियोग-


अस्य श्री प्राण-प्रतिष्ठा मंत्रस्य विष्णुरूद्रौ ऋषी ऋज्ञजु: सामानिच्छदासी  प्राणख्या देवता । ॐ आं बीजं ह्रीं शक्ति: क्रां कीलकं यं रं लं वं शम षम सं हं हं स: एत: शक्तय: यंत्र/गुटिका/मूर्ति प्रतिष्ठापन विनियोगा: ॥


मंत्र का कम से कम २१ बार जाप करे या १०८ बार,जाप करते समय यंत्र स्पर्श कर सकते है


ॐ आं ह्रीं क्रों यं रं लं वं शम षम सं हं स: देवस्य प्राणा: इह प्राणा: पुरुच्चार्य देवस्य सर्वेनींद्रयानी इह:। पुरुच्चार्य देवस्य त्वक्पाणि पाद पायु पस्थादीनी इह: । पुरुच्चार्य देवस्य वाड मनुश्चक्षु: श्रोत्र घ्राणानि इहागत्य सुखेन चीरं तिष्ठतु स्वाहा ॥


यंत्र प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यंत्र का पूजन करके स्थापित कर दीजिये



श्रीसदगुरुजीचरनाश्रयह:...............

SABAR VASHIKARAN SADHNA (साबर वशीकरण साधना)





दुनिया मे वशीकरण क्रिया को बदनाम कर दिया है परंतु इसका महत्व वही लोग समजते है जिनहे इसका जरूररत है........



गोपनीय सूत्र-



कोई भी वशीकरण साधना सिद्धि से पूर्व मंगलवार को हनुमान जी का पूजन करना आवश्यक है और बच्चो मे प्रसाद बाट दे 


जिस व्यक्ति पे आप प्रयोग करते हो उससे प्रयोग करने के बाद जुट नहीं बोलना चाहिए सिर्फ सती बोलिए नहीं तो वशीकरण का प्रभाव कम होने लगता है


व्यक्ति विशेष से आपका परिचय होना चाहिये,अगर बात होती होगी तो बहोत अच्छी बात है॰


रविवार और मंगलवार प्रत्येक वशीकरण साधना एवं प्रयोग करने के लिए उपयुक्त है


साबर वशीकरण साधना मे रुद्राक्ष का माला और उत्तर दिशा का महत्व है,आसन और वस्त्र लाल हो………….




साबर वशीकरण मंत्र-





॥ मै तोह मोहो मोहिनी,तू मोहे संसार । बाट के बटोहिया मोहे,कुंआ की पनिहारी मोहे,पलना बैठी रानी मोहे। दुलीचा बैठो राजा मोहे,ठग मोहे,ठाकुर मोहे,पर-घर मोहे। सब जात मोहले अमुकको मोहाईले । मेरे पाईन तर आन राख । उलटन्त वेद ,पलटन्त  कट काया ,तोहि श्रीनरसिंह बुलाया । मेरी भगत ,गुरु की सकत,फुरै मंत्र ईश्वरो वाचा ॥





साधना विधि-




व्यक्ति विशेष पर प्रयोग करने से पूर्व मंत्र का किसी भी शुभ समय मे ११ दिन से पहिले या ११ डीनो मे १,१०० बार मंत्र जाप करले,मंत्र जाप के बाद जलते हुये कोयलों पे मंत्र से लोबान+गूगल मिलकर १०८ आहुती दे दीजिये,इस सारे क्रिया के बाद अमुक के जगह स्त्री/पुरुष का नाम लेकर नित्य १०८ बार जाप कुछ ही दिन करने से व्यक्ति विशेष आपके अनुकूल हो जायेगा,साधमा पूर्णत: प्रामाणिक है सोच समजकर ही प्रयोग करे नहीं तो हानी १००% होगी ये मेरा गारंटी है...........आगे आपके विचार जो स्वयं आप ही बदल सकते हो........






श्री-सदगुरुजीचरनार्पणमस्तू.................

7 Jul 2013

गुप्त नवरात्रि साधना




जो साधक सिद्धाश्रम साधना या कुण्डलिनी जागरण साधना सम्पन्न करना चाहते है उनको भी पहिले बगलामुखी साधना सम्पन्न करनी चाहिये तभी जाकर आगे की साधनओ मे सफलता प्राप्त होती है अन्यथा कुण्डलिनी जागरण मे अत्यधिक विलम्ब होता है,इसे साधना मे आसान पीला,धोती पीली,यंत्र भी पीले रंग के कागज पे बनाना है,दीपक मे जलाने वाली रुई भी हल्दी से रंग दीजिये,सरसों के तेल का दीपक होना चाहिये तो दीपक मे भी थोड़ीसी हल्दी डाल दीजिये यह आवश्यक नियम और गोपनीय सूत्र है,क्यूकी माँ बगलामुखी जी का एक नाम पीताम्बरा भी है....
यह एक सौम्य साधना है जिससे जीवन के हर क्षेत्र मे विजय प्राप्त होता है,सभी संकटों से मुक्ति होती है,अगर किसिके साथ मनमुटाव हो तो वह भी समाप्त हो जाता है,साधक के जीवन मे किसी भी प्रकार का भय साधना के उपरांत बचता ही नहीं,यह साधना माँ बगलामुखी जी के प्रत्यक्ष दर्शन प्राप्त साधना है,परंतु यहा यह बात आवश्यक नहीं के माँ सभी साधक गण को प्रत्यक्ष दर्शन दे,हो सकता है माँ स्वप्न मे साधक को दर्शन दे या उससे स्वप्न मे ही किसी भी रूप मे आकर बात करे

जब मंगलवार के दिन नवरात्रि का शुरवात होता है तो बगलामुखी साधना श्रेष्ठ माना जाता है............
बगलामुखी मंत्र जाप के लिए हल्दी का माला सर्वश्रेष्ठ माना जाता है,पीली हकीक माला,सफ़ेद हकीक माला हो तो उस्से हल्दी से रंग दीजिये,यंत्र भोजपत्र या पीले रंग के कागज पे बनाये,साधना ब्रम्ह-मुहूर्त मे करना है तो मुख पच्शिम दिशा को और रात्रि मे करना हो तो मुख दक्षिण दिशा के तरफ हो,रात्रि का समय 10 बजे के बाद
का होना चाहिए,साधना मे 51 माला मंत्र जाप नित्य करना है,यह साधना 9 दिवसीय है॰10 वे दिन पीली सरसो से 1008 आहुतिया देकर हवन का कार्य सम्पन्न करे ताकि आपके घर से सारे कष्ट-बाधा-दोष समाप्त हो जाये और घर मे पैसा टीका रहे,व्यर्थ का कोई भी खर्च ना हो.....
प्रसाद मे बेसन का एक लड्डू नित्य माँ को चढ़ाये,सिर्फ पीले रंग के पुष्प ही चढ़ाये,बाजो पर भी पीले रंग का वस्त्र हो॰




विनियोग




ॐ अस्य श्री बगलामुखी मंत्रस्य नारद ऋषी: त्रिश्टुप छन्द:बगलामुखी देवता: । ह्लीं बीजं स्वाहा शक्ति: मम सर्व अभीष्ट कार्य कार्य सिद्धर्थे जपे विनियोगा: ॥





ॐ पीताम्बरा दैव्यै नम: मंत्र का मानसिक रूप से 5-10 मिनिट तक जाप करे और माँ को हृदय मे स्थापित करने की कोशिश कीजिये या प्रार्थना करे हे माँ आप मेरे हृदय मे स्थापित हो.........



मंत्र





॥ ॐ ह्लीं बगलामुखी दर्शय दर्शय ह्लीं ॐ फट ॥



om hleem bagalamukhi darshay darshay hleem om phat


साधना समाप्त होते ही माला और यंत्र को जल मे विसर्जित करना आवश्यक है,साधना काल मे माँ 9 दिन से पूर्व ही दर्शन दे तो भी साधना 9 दिनो तक करनी है,बीच मे ही साधना नहीं छोडनी चाहिये........

साधना मे ब्रम्हचर्य का पालन आवश्यक है,रात्रि मे जमीन पर सोये,किसि भी स्त्री के प्रति मातृस्वरूप का भाव रखे,ज्यादा टी॰ व्ही॰ भी ना देखे,साधना मे कोई भी शब्द असत्य ना बोलिये...........
और भी कुछ सवाल साधना के प्रति हो तो मुजसे इनबॉक्स मे पुछिये,माँ बगलामुखी आपको दर्शन दे यही कामना करता हु



श्री सदगुरुजीचरनार्पणमस्तू.................


5 Jul 2013

इच्छापूर्ति अमावस्या



सोमवती अमावस्या साधना करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मुहूर्त है,इस दिन अमावस्या दोपहर 12:43 तक रहेगा इसी समय मे इच्छापूर्ति साधना करनेसे उत्तम फल प्राप्त होता है,विज्ञान का कहेना है इंसान के मन मे तीन लाख प्रकार का इच्छा एक ही समय मे होता है जिसे वह पने सामने चाहकर भी प्रकट नहीं कर सकता क्यूकी येसा करने से उसमे पागलपन का निर्मिति होता है,हमारे शास्त्र मे प्रमाण मिलता है सोमवती अमावस्या के शुभ अवसर पर साधना करने से बहोत सारे प्रकार का इच्छा पूर्ण होता है,इस साधना के माध्यम से जीवन मे 3 प्रकार का मनोकामना पूर्ण होता है,आवश्यकता है तो सिर्फ विश्वास और श्रद्धा का जो हमे साधना मे पूर्ण सफलता देता है.

साधना सुबह 9 बजे के बाद करनी है,माला कोई भी हो तो चलेगी सिर्फ आप उसे प्राण-प्रतिष्ठित कर लीजिये,सामने गुरुचित्र होना चाहिये और गुरुपूजन का सामाग्री,गणेश पूजन और गुरु पूजन के बाद गुरुमंत्र जाप करे.

सामने शिव जी का चित्र या शिवलिंग रखिये और 5 मिनिट तक ॐ नम: शिवाय का जाप करले,जिनके पास पारद शिवलिंग हो वह साधक ह्रीं क्लीं पारदेश्वरय सशक्तिकाय प्रसीद प्रसीद क्लीं ह्रीं ॐ नम:मंत्र का जाप करे और साथमे शिवजी का जल अभिषेक भी कर लीजिये.



संकल्प-




दाहिने हाथ मे जल,अक्षत व कुंकुम लेकर संकल्प कीजिये



ॐ विष्णु र्विष्णु र्विष्णु: श्री मदभगवतों महाप्रभावस्य द्वितीय परार्धे श्वेतवारहकल्पे भारत खण्डे पुण्य क्षेत्रे, अमुक गोत्रीय(अपना गोत्र बोले) अमुक शर्माहं (अपना नाम बोले) अद्द मम अमुक (अपनी इच्छा बोलिये) मनोकामना पूर्ति निमित्तं निम्न मंत्रम अहं जापं करिष्ये ॥ 




जल गुरुचरनोमे समर्पित करे और गुरुजी से मनोकामना पूर्ति हेतु प्रार्थना करे

मनोकामना पूर्ति मंत्र का 21 माला जाप करे



मनोकामना पूर्ति मंत्र-






॥ ॐ श्रीं मनोवांछितं देही ॐ ॐ नम:शिवाय ॥

om shreem manovanchitam dehi om om nam: shivay 





भगवान सदाशिव जी आपकी कामना पूर्ण करे,मंत्र जाप के बाद सामग्री को जल मे प्रवाहित कर दे.........


श्री-सदगुरुजीचरनार्पणमस्तू.......................................................